वैदिक दृष्टि से जीवन, ब्रह्मांड और सत्य को समझने का प्रयास।
कुछ लोग गीता को वैराग्य का ग्रंथ मानते हैं, तो कुछ इसे केवल पढ़ने या सुनने से जीवन सुधर जाने की आशा रखते हैं। किन्तु यह दोनों ही द...
आधुनिक विज्ञान भी अपनी परिभाषा में कहता है कि जिसको खण्डित न किया जा सके, वही ‘तत्व’ है। इस दृष्टि से यह परम तत्व ही वास्तविक ‘मूल...
मनुष्य जीवनभर इच्छाओं और भोगों में उलझा रहता है और अपने अस्तित्व, जीवन और मृत्यु के वास्तविक प्रश्नों पर विचार नहीं करता। इस लेख म...
यह जगत वैसा नहीं है, जैसा हमें दिखाई देता है। हमारी इन्द्रियाँ जिस सीमा तक अनुभव करती हैं, वही हमारा सत्य बन जाता है।
गीता का विज्ञान उस भ्रम को तोड़कर यह बताता है कि मनुष्य अपने कर्मों से नहीं, अपनी 'कामना' से बंधा हुआ है।
कुछ लोग गीता को वैराग्य का ग्रंथ मानते हैं, तो कुछ इसे केवल पढ़ने या सुनने से जीवन सुधर जा...
आधुनिक विज्ञान भी अपनी परिभाषा में कहता है कि जिसको खण्डित न किया जा सके, वही ‘तत्व’ है। इ...
मनुष्य जीवनभर इच्छाओं और भोगों में उलझा रहता है और अपने अस्तित्व, जीवन और मृत्यु के वास्तव...
वैदिक विज्ञान यह स्पष्ट करता है कि सृष्टि, जीवन और चेतना को अलग-अलग करके नहीं समझा जा सकता...
वैदिक दृष्टिकोण के अनुसार इस ब्रह्मांड में व्याप्त प्रत्येक कण-कण के अस्तित्व का आधार “काम...
भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान, वेदान्त, योग और आत्मा-परमात्मा के गहन विषयों पर लेख एवं...
वैदिक ज्योतिष, कुण्डली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्र और फलित ज्योतिष पर आधारित ज्ञानवर्...
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जीवन में सफलता, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को जगाने वाले प्रेरणादायक लेख।
श्रेणी देखें →"तत् त्वम् असि।"
— छान्दोग्योपनिषद् ६.८.७ · तू वही (ब्रह्म) है